होमियोपैथी से गठिया रोगों का उपचार: डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी
*होमियोपैथी से गठिया (अर्थराइटिस) रोगों का उपचार:डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
हमारा भारतवर्ष एक विशाल देश है,जन समान्य की अज्ञानता,आहार विहार के नियमो के उदासीनता स्वास्थ के प्रति लापरवाही आदि के कारण रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है।
होमियोपैथी विश्व की सरलतम चिकित्सा पद्धति मानी जाती है,इसी पद्धति के द्वारा जटिल से जटिल रोगों की चिकित्सा बड़ी आसानी से की जा सकती है,आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं ने जिन रोगियों को असाध्य कहकर छोड़ दिया उन्हें होमियोपैथी द्वारा न केवल शीघ्र आराम हुआ बल्कि वे पुर्णतः रोगमुक्त भी हो गये।
*गठिया का अर्थ है एक या एक से अधिक जोड़ों में सूजन होना*, हालांकि,गठिया का मतलब केवल सूजन नहीं होता, इसमें जोड़ों और उसके आस-पास के ऊतकों की 100 से अधिक समस्याएं शामिल हैं। प्रभावित ऊतकों और गठिया के प्रकार के आधार पर इसके लक्षण अचानक पैदा हो सकते हैं या ये समय के साथ धीरे-धीरे भी बढ़ सकते हैं।
*ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis)* गठिया का सबसे आम प्रकार है,ये हड्डियों के बीच में मौजूद कार्टिलेज के नुकसान के कारण होता है,और अधिकतर उंगलियों,कूल्हों व घुटनों के जोड़ों को प्रभावित करता है, इसके कारण हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे दर्द,जोड़ों में सूजन,अकड़न और हिलने-डुलने में परेशानी जैसी समस्याएं अनुभव होती हैं।ऑस्टियोआर्थराइटिस मानसिक तनाव के कारण व अनुवांशिक हो सकता है,मोटापा,चोट,उम्र और रोज़ाना एक ही प्रकार से हिलने-डुलने वाला काम करने से ऑस्टियोआर्थराइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है,
*रूमेटाइड आर्थराइटिस* गठिया का दूसरा सबसे आम प्रकार है और इसमें जोड़ों व उसके आस-पास के ऊतकों में सूजन होती है, ये एक स्वप्रतिरक्षित समस्या है,जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगती है।
*गठिया के मुख्य लक्षण* जोड़ों में दर्द व अकड़न, हाथ-पैर सुन्न होना और थकान आदि हैं,इसके अलावा, जोड़ों में गर्माहट महसूस हो सकती है और जोड़ों की अकड़न एक समय में एक घंटे तक रह सकती है,समय के साथ, जोड़ों की आकृति बिगड़ सकती है और उनमें अत्यधिक अकड़न हो सकती है, ऐसे कुछ टेस्ट मौजूद हैं, जिनसे इस समस्या का पता लगाया जा सकता है। ये टेस्ट हैं, रुमेटाइड फैक्टर टेस्ट, कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट और एक्स-रे।
*गठिया के अन्य प्रकार हैं, जुवेनाइल आर्थराइटिस, सोरिएटिक आर्थराइटिस और गाउट।*
*गठिया में क्या खाना चाहिए* -
अदरक,ब्रोकली,आखरोट खाएं,जामुन,पालक,अंगूर खाना चाहिए
*गठिया में क्या न खाएं और परहेज*- गठिया में लाल मांस,चीनी, तले हुए खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिये,शराब न पीएं,प्रोसेस्ड फूड न खाएं, खाएं दूध से बने उत्पाद, अधिक नमक न खाएं, मक्के का तेल
*गठिया की होम्योपैथिक दवा*
कुछ अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि गठिया के लिए होम्योपैथिक उपचार बहुत ज्यादा असरदार है* इसके लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं हैं, *अर्निका मोंटाना (Arnica Montana), बेलाडोना (Belladonna), एपिस मेलिफिका (Apis Mellifica) और कॉस्टिकम (Causticum)*
गठिया को ठीक करने के लिए और लक्षणों से राहत दिलाने के लिए होम्योपैथिक उपचार में व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य और उसके चिकित्सा इतिहास का ध्यान रखा जाता है। होम्योपैथी में केवल समस्या के मुख्य लक्षण का ही उपचार नहीं किया जाता, बल्कि इसके कारण का भी पता लगाया जाता है। इसके लिए व्यक्ति के शुरूआती लक्षण, लक्षणों का तरीका, बीमारी से संबंधित कारक और उन कारकों के बारे में पूछा जाता है, जिनसे लक्षण बढ़ जाते हैं।
इसके बाद व्यक्ति के लक्षणों के आधार पर उसे उचित होम्योपैथिक दवा दी जाती है। कुछ अध्ययनों से गठिया के इलाज में होम्योपैथिक दवाओं के असर की पुष्टि हुई है।
*लक्षण: नीचे दिए लक्षणों होने पर दी हुई होमियोपैथिक दवा लेने से आराम मिल सकता है*
*एकोनिटम नेपेलस*
छाती में दर्द।
धड़कन तेज होने के साथ चिंता होना।
उंगलियों में गुदगुदी।
पीठ की मांसपेशियां सुन्न होना और उनमें अकड़न।
गर्दन में अकड़न, जिससे दर्द होता है।
हाथ-पैरों में ठंड की भावना होना।
हाथ-पैरों में कुछ देर के लिए भावना न रहना।
हाथ और पैर में तेज दर्द होना, जो गर्म मौसम में बढ़ जाता है।
उल्टे हाथ में दर्द।
जोड़ों की सूजन।
हाथ-पैर में दर्द, जो रात को बढ़ जाता है।
कूल्हे के जोड़ का ढीला महसूस होना।
जोड़ों का आपस में रगड़ना।
जांघों में गुदगुदी।
त्वचा और जीभ में सूजन।
छाती में लगातार दबाव महसूस होना।
सांस फूलना, जो रात के समय बहुत बढ़ जाता है।
आवाज के प्रति संवेदनशीलता।
लगातार चिंतित और परेशान रहना।
बेचैनी होना।
खुली हवा में लक्षण बेहतर हो जाना।
*अर्निका मोंटाना*
ये दवा लंबे समय से चल रहे गठिया के लिए अच्छी है और निम्नलिखित लक्षण अनुभव करने पर दी जाती है:
घबराहट और उलझन।
पूरे शरीर में अतिसंवेदनशीलता, जिसके कारण व्यक्ति को अच्छा नहीं लगता कि कोई उसे हाथ लगाए।
अकेले रहने की इच्छा होना।
मुंह का स्वाद कड़वा होना।
मसूड़ों में दर्द।
छाती में दर्द।
पीठ, हाथ और टांगों में दर्द।
लेटने पर सतह बहुत सख्त महसूस होना।
सिर नीचे करके लेटने पर बेहतर महसूस करना।
हाथों के अगले हिस्से में ठंडक महसूस होना।
पेडू के क्षेत्र में कमजोरी।
जोड़ों में सूजन, जो पैरों से शुरू होकर ऊपर की तरफ जाती है।
थकने के बाद भी नींद न आना।
सोते समय अपने आप मल आना।
*एपिस मेलिफिका*
बेहोशी होना
गुस्सैल और उग्र व्यवहार।
सिर में ऐसा दर्द होना जैसे किसी ने छुरा भौंका हो।
चेहरे पर सूजन के साथ दर्द।
मुंह और गले में जलन व दर्द।
मसूड़ों और होठों की सूजन।
प्यास कम लगना।
सांस लेने में दिक्कत होना।
घुटनों में सूजन।
टांगों में दर्द।
पीठ और हाथ-पैर में गठिया का दर्द, जो गर्मी या दबाव बनाने से बदत्तर हो जाता है।
सोकर उठने के बाद और दोपहर में जोड़ों का दर्द होना।
दाईं तरफ लेटने पर दर्द बेहतर होना।
थकान और लगातार उनींदापन
हाथ-पैर सुन्न होना।
हाथ-पैर में खुजली और झुनझुनी।
*बेलाडोना*
ये दवा चंचल दिमाग वाले लोगों को ज्यादा सूट करती है जिनका दिमाग आसानी से भटक जाता है।
प्रभावित जोड़ में अचानक दर्द, जलन और लाली।
सिर में नस फड़कती हुई महसूस होना।
रात के समय सिरदर्द।
चेहरे में सूजन के साथ उसकी मांसपेशियों में झटके पड़ना।
दांत में दर्द और जीभ लाल होना।
हाथ-पैर में तेज दर्द।
जोड़ों में हाथ लगाने पर दर्द होना।
जोड़ों में सूजन।
त्वचा पर लाल फैलती हुई धारियां बनना।
हाथ-पैर में मरोड़ के साथ दर्दनाक ऐंठन।
हाथ-पैर ठंडे पड़ना।
पेट दर्द के साथ भूख लगना बंद होना।
सीधे न लेटने पर रीढ़ की हड्डी में दर्द।
धड़कन बहुत तेज होने के साथ सांस लेने में दिक्कत।
गर्दन में अकड़न।
पेडू के क्षेत्र में और कूल्हे के जोड़ में दर्द।
बेचैनी वाली नींद आना।
*ब्रायोनिया एल्बा*
चिड़चिड़ापन।
मुंह और गला सूखना। (और पढ़ें - गले के सूखने पर क्या करें)
उठने पर मतली और बेहोशी।
पेट पर हाथ लगाने में दर्द।
गर्दन में अकड़न।
पीठ में अकड़न और कठोरता। ये लक्षण मौसम में थोड़े से भी बदलाव से बढ़ जाते हैं, जैसे तापमान बढ़ने से।
घुटनों में अकड़न और तेज दर्द, जो हिलने-डुलने से या शारीरिक परिश्रम करने से बढ़ जाता है।
पांव में सूजन और छूने में गरम महसूस होना। (और पढ़ें - पैरों में सूजन के घरेलू उपाय)
सूजन के कारण जोड़ों में लाली, जो ठंडी सिकाई करने से बेहतर हो सकते हैं।
हाथ-पैर में खिंचाव वाला दर्द।
हल्का सा भी दबाव बनाने पर हाथों और टांगों में दर्द होना।
दाएं हाथ व पैर का लगातार हिलते रहना।
त्वचा का रंग फीका पडना।
*कैल्केरिया फॉस्फोरिका*
बच्चों को ये दवा देने की सलाह नहीं दी जाती है।
डिप्रेशन।
चक्कर आने के साथ सिर में हल्का दबाव।
ऊपरी जबड़े की हड्डी में दाईं से बाईं ओर जाने वाला दर्द।
दांतों में संवेदनशीलता।
जीभ सुन्न होना और सूजन।
हाथ-पैर में थकान और दर्द।
गर्दन में अकड़न।
दाईं से बाईं तरफ जाने वाली गर्दन की ऐंठन।
हल्का सा भी हिलने-डुलने पर पीठ में तेज दर्द।
पीठ में तेज दर्द।
कंधों में दर्द।
उल्टे हाथ में दर्द और पैरालिसिस।
हाथ और उंगलियों के जोड़ न हिला पाना।
पैरों में व्याकुलता।
नसों में सूजन।
पूरे शरीर में खुजली और जलन।
पैरों में थकान और कमजोरी।
पिंडलियों की हड्डियों में दर्द।
सोते समय अत्यधिक पसीना आना।
*कॉस्टिकम*
चेहरे पर मस्से।
बार-बार मूड बदलना।
चेहरे की दाईं तरफ संवेदना न होना और पैरालिसिस।
चेहरे की हड्डियों में दर्द।
जबड़े को हिलाने में दर्द।
दांतों से बार-बार गाल को अंदरूनी तरफ से काट लेना।
मीठा खाने की बिलकुल इच्छा न होना।
कंधों के बीच में अकड़न और कठोरता।
गर्दन में दर्द।
पीठ की दाईं तरफ दर्द।
पीठ की मांसपेशियां सुन्न होना।
जोड़ों में गंभीर दर्द।
हाथों में संवेदना न रहना।
अत्यधिक दर्द के कारण चलने में दिक्कत होना।
पांव में खुजली।
रात के समय टांगों में बेचैनी होना।
रात के समय उनींदापन या नींद न आना।
ठंडे मौसम में लक्षण बत्तर हो जाना।
*डुलकमारा*
अशांति और व्यग्रता।
सुबह के समय मतली।
सिर में जमाव।
चेहरे पर लाली।
मुंह एक तरफ मुड़ना।
गर्दन में अकड़न।
हाथों और कंधों में तेज दर्द।
कूल्हे की ऊपरी तरफ तेज दर्द।
ठंड लगने के साथ हाथों का पैरालिसिस।
हथेलियों में पसीना आना।
घुटनों तक सूजन होना, जो ठंडे और नम मौसम में बढ़ जाता है।
पांव में झनझनाहट।
सामान्य कमजोरी और थकान।
हाथ-पैर का पैरालिसिस।
दिन में उनींदापन।
बहुत जल्दी नींद खुल जाना।
छाती पर वजन महसूस होना।
सांस लेने में दिक्कत।
गठिया का दर्द खत्म होने के बाद दस्त होना और दस्त बंद होने के बाद दोबारा दर्द शुरू हो जाना।
त्वचा के फोड़े फुंसी ठीक होने के बाद गठिया का दर्द शुरू हो जाना।
मुंह का स्वाद कड़वा होना।
*नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।*
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
होमियोपैथिक चिकित्सक
त्रिवेदी होमियोपैथिक क्लिनिक
लिली चौक,पुरानी बस्ती,
बरई मंदिर रोड, रायपुर, छत्तीसगढ
*8462030001*
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*@Dr.Trivedis Homeopathy*
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