*गर्मी से बचने के घरेलू उपाय व बीमारियों का होमियोपैथिक उपचार: डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
तेज धूप ने परेशान करना शुरू कर दिया है। गर्मी में हमारे शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है, इसलिए जितना हो सके गर्मी से बचने की कोशिश करनी चाहिए।रायपुर पुरानी बस्ती के होमियोपैथिक विशेषज्ञ डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी के अनुसार घर से निकलते समय हमेशा सिर सूती कपड़े, टोपी से ढंक लें और घर से निकलने से पहले पानी पी कर ही निकलें। घरेलू उपायों को आजमा कर भी हम गर्मी के प्रकोप से बच सकते है।
-सादा पानी आपकी त्वचा को हमेशा तरोताजा रखता है। आप अगर बहुत थकान महसूस कर रहे हैं तो पानी के छीटों से आप फ्रेश महसूस करेंगे ।
-खीरे के जूस को आप चेहरे पर लगाएं, यह प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है। इससे चेहरे पर ठंडक महसूस होगी और आप सनबर्न की समस्या से भी बचे रहेंगे।
-पिसी हुई चंदन, तुलसी और गुलाब आदि नेचुरल चीजें लगाने से गर्मी में राहत मिलती है। धूप से आने के कुछ घंटों बाद मुल्तानी मिट्टी और चंदन पाउडर लगाने से आपकी त्वचा को ठंडक महसूस होगी।
-घमौरियां हो जाने पर नीम और तुलसी का पेस्ट लगाना फायदेमंद होता है। गुलाब की पत्तियों को पानी में भिगोकर उस पानी से चेहरा धोने पर गर्मी के मौसम में त्वचा मुलायम बनी रहती है।
-चेहरे पर पीसी हुई चंदन और खीरे के जूस के साथ दो-तीन बूंद ग्लिसरीन की बूंदें और गुलाब जल मिलाकर उसका लेप लगाने पर भी राहत मिलती है।
-खाने-पीने का रखें खास ध्यान
गर्मी के मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पेट की खराबी और अधिक तैलीय व मसालेदार खाद्य-पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। खानपान की गड़बड़ी से पाचन-क्रिया तुरंत प्रभावित होती है। इससे अनेक बीमारियां हो सकती हैं। इस मौसम में सबसे ज्यादा दूषित जल और पेय पदार्थों का संक्रमण फैलता है । उल्टी, दस्त, जी मिचलाना, लू लगने, त्वचा पर फफोले होना, काले चकत्ते पडऩा या डंक जैसी पित्ती उभरना जैसी जनस्वास्थ्य समस्यायें प्राय: देखी जाती है। गर्मी में अधिक शुष्कता के कारण शरीर में जल की मात्रा कम हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए बार-बार जल और जलीय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इस मौसम में दही, मौसमी ताजे फल जैसे संतरा, पपीता, स्ट्रॉबेरी, ग्रेप का जूस ज्यादा से ज्यादा पीये। ये हेल्दी होने के साथ-साथ शरीर को अंदर से ठंडा रखने में सहायक होते हैं।
*मुख्य बीमारियां*
गर्मी का मौसम आते ही कई बीमारियों को साथ लेकर आता है। कुछ बीमारियां तो सामान्य होती हैं जिनका इलाज आसानी हो जाता है, जबकि कुछ बीमारियां गंभीर होती हैं, अगर हम इन बीमारियों का सही समय पर इलाज न करें तो ये घातक रूप ले लेती हैं। हम गर्मी में होने वाली ऐसी ही बीमारियों के बारे में बताएंगे, जिससे आपको सतर्क रहने की जरूरत होती है।
बीमारियांः
*खसरा*
खसरा का रोग सांस के जरिए फैलता है। खासकर खसरा गर्मियों में जी से फैलता है। खसरा होने पर शरीर पर लाल रंग छोटे दाने हो जाते हैं और बुखार, खांसी, नाक बहना व आंखों का लाल होना जैसी दिक्कते होती हैं। खसरा को रूबेला भी कहा जाता है।
खसरा से संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना इसे फैलाने से रोक सकता है।
*पीलिया*
गर्मी के मौसम में पीलिया होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसको हेपेटाइटिस ए भी कहा जाता है। पीलिया दूषित पानी या खाने से हो सकता है। पीलिया में रोगी की आंखे व नाखून पीले हो जाते हैं और पेशाब भी पीले रंग की होती है।
पीलिया हो जाने पर दूषित खाने बचें। इसके साथ ही सिर्फ उबला हुआ या छना हुआ ही पानी पीएं।
*टाइफॉइड*
टाइफॉइड की बीमारी गंदे पानी और खाने से होती है। गर्मी के मौसम आते ही टाइफॉइड होने लगता है। इसके कारण लगातार बुखार रहना, भूख कम लगना, उल्टी होना और खांसी-जुकाम हो जाता है।
टाइफॉइड से बचने के लिए खाने-पीन के पदार्थों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
*चेचक*
गर्मी की शुरुआत में ही चेचक का संक्रमण फैलता है। चेचक के होने शरीर में लाल दाग पड़ जाते हैं। इसके अलावा सिरदर्द बुखार और गले में खराश इसके शुरुआती लक्षण हैं। जिस किसी को भी चेचक होता है, उसके खांसी या छींक आती है तो यह रोग फैलता है।
चेचक से बचने के लिए बाहर से घर आने पर अपने हाथों को धोएं और चेचक से पीड़ित को अलग कमरे में रखें।
*घेंघा*
थॉयराइड ग्लैंड के बढ़ जाने से घेंघा का रोग हो जाता है। गर्दन में सूजन आ जाना इसका पहला लक्षण होता है। घेंघा हो जाने पर सांस लेने में दिक्कत, खांसी आना, निगलने में कठिनाई, गला बैठना जैसी समस्या हो जाती हैं।
बचाव- घेंघा से निजात पाने के लिए होमियोपैथिक दवाइया उपयोग में लाई जा सकती है।
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी के अनुसार होम्योपैथिक दवाइयां गर्मियों में स्वस्थ रहने में मदद करेंगी बीमारी होने के पहले प्रतिरोधक के रूप में व होने के बाद दवाइयों का सेवन कर बीमारी से बचा जा सकता है*
हम सभी जानते हैं कि गर्मी का मौसम कितना खतरनाक हो सकता है। गर्मी में सिरदर्द बहुत आम समस्या होती हैऔर अक्सर यह पहला संकेत होता है कि कुछ तो गड़बड़ है। होम्योपैथिक दवाइयां गर्मी के रोगो से निजात दिलाने में सक्षम हैं। होम्योपैथिक उपचारों के लिए कुछ सहायक मुख्य नोट्स दिए गए हैं जो आपके सिरदर्द, सनबर्न और अन्य लक्षणों को कम कर सकते हैं।
*बेलडोना*- यह गर्मी के लिए एक अच्छी दवा है यदि आप फैली हुई शिराओं से पीडि़त हैं, टपकन वाले सिरदर्द, पसीने से उबलने के पश्चात कोई लक्षण आये हैं तो आपको तुरंत इस दवा की एक खुराक लेनी चाहिए। सिर पर एक ठंडा तौलिया लपेटकर भी आप सुखद महसूस कर सकते हैं।
*ब्रायोनिया*-आप इसे कपाल में होने वाले सिरदर्द में जो चलने फिरने से बढ़ता हो, उपयोग कर सकते हैं।
*फेरम फोस*- यह होम्योपैथिक उपाय शारीरिक कमजोरी, थकान और अन्य समान लक्षणों के साथ गर्मी से संबंधित सिरदर्दों को राहत देता है।
*लैकेसिस*- गर्म चमक, गर्म पसीना, गर्म भारी सिरदर्द और गर्मी के बाद आने वाली थकान, इस दवा के साथ सभी का बहुत अच्छा इलाज हो सकता है।
*पल्साटिला*- यदि आप चोट लगने पर दु:खता है जैसे धड़कते सिरदर्दों से जिसमें दबाने से आराम हो, पीडि़त हैं तो पल्साटिला आपके लिए दवा है।
केन्थरिस- चमकती हुई लाल त्वचा, स्पर्श करने पर गर्म और बहुत संवेदनशील। सूर्य के प्रकाश के कारण जले हुए की तरह धूप की कालिमा के साथ फफोले। काटने या डंक जैसा तीव्र, तीखा और जलन युक्त दर्द।
*अर्टिका यूरेन्स*- सूर्य प्रकाश में लम्बे समय तक रहने के कारण अगर दर्द में कांटेदार या खुजली की अनुभूति होती है। लालरंग के चकत्ते जैसे कि जला हुआ हो और खुजली तीव्रता से हो। डंक और खुजली वाली पित्ती में यह बहुत उपयोगी है।
*ग्लोनाइन*- लू लगने के साथ तेज, फटने लायक सिर दर्द, चक्कर आना और मानसिक भ्रम की स्थिति। व्यक्ति को हो सकता है, मतली और उल्टी।
आर्सेनिक- लू लगना साथ ही मतली और उल्टी। बेचैनी और कमजोरी
*नेट्रम सल्फ*– सूरज की रोशनी के संपर्क से सिर दर्द। गर्म मौसम के साथ मतली।
*नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।*
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
होमियोपैथिक चिकित्सक
त्रिवेदी होमियोपैथिक क्लिनिक
लिली चौक,पुरानी बस्ती,
बरई मंदिर रोड, रायपुर, छत्तीसगढ
*8462030001*
*Facebook instagraam*
*@Dr.Trivedis Homeopathy*
Comments
Post a Comment