*होमियोपैथी से उच्च रक्तचाप का इलाज संभव - डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*


हम में से ज्यादातर लोग तनाव में हैं या गलत लाइफस्टाइल अपनाकर जी रहे हैं। इसका खामियाजा हमारे छोटे-से दिल को उठाना पड़ता है। फालतू बोझ उठाते-उठाते वह बेचारा थक जाता है। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे पर दिल को दुरुस्त रखने के तरीके जानते  है।

*क्या है हाइपरटेंशन*
हाइपरटेंशन को हाई ब्लड प्रेशर भी कहा जाता है। जब भी हमारा दिल धड़कता है, वह आर्टरीज के जरिए पूरे शरीर को ब्लड सप्लाई करता है। जिस प्रेशर के साथ ब्लड वेसल्स की दीवारों से टकराता है, उसे ब्लड प्रेशर कहा जाता है। ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की समस्या या आंखों से जुड़ी बीमारियों की वजह बनता है। होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी बताते हैं कि हाई बीपी से स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का खतरा भी 50 फीसदी तक बढ़ जाता है। वजह, हाई बीपी होने पर ब्लड वेसल्स पर दबाव बनता है और वे सिकुड़ जाती हैं। इससे दिल को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
*हाई बीपी की वजहें*
खानदानी यानी पैरंट्स या फैमिली में दूसरे करीबी को हो, तो हाई बीपी होने के चांस 20-25 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। मोटापा,एक्सरसाइज न करना, तला-भुना खाना,मानसिक तनाव, स्मोकिंग आदि के अलावा किडनी की बीमारी,थायरॉयड, ट्यूमर आदि बीमारियां भी बीपी की वजह बनती हैं। मानसिक तनाव व लाइफ स्टाइल सही नही होना मुख्य कारण माना जा सकता है

*कितनी रीडिंग नॉर्मल* 
बीपी उम्र के हिसाब से रहता है फिर भी सामान्य तौर पे इतना प्रेशर होना चाइये
ब्लडप्रेशर अपर बीपी लोअर बीपी 
नॉर्मल 130 से नीचे और 85 से नीचे 
प्री-हाइपरटेंशन 130-139 और 85-89 
हाइपरटेंशन 140 और 90+ 

*कैसे करें चेक*
बार बीपी चेक कराते हैं और ज्यादा आता है तो घबराएं नहीं। अगले दिन फिर चेक कराएं या खुद करें। 3 दिन लगातार चेक करने के बाद भी रीडिंग ज्यादा आती है तो डॉक्टर के पास जाएं। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं, न ही स्मोकिंग करें। आराम से बैठकर बीपी चेक करें।

*इमरजेंसी कब*
घबराहट, तेज सिर दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना या सीने में दर्द महसूस हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।

*कैसे रहें फिट:*
*एक्सरसाइज*
- दिल की बीमारी से बचने के लिए रोजाना कम-से-कम आधा घंटा कार्डियो एक्सरसाइज करें जैसे कि ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइकलिंग, स्विमिंग, एरोबिक्स, डांस आदि हैं। वॉक में 1 मिनट में 40-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में 1 मिनट में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलते हैं। 
- घुटने की बीमारी या दूसरी वजहों से तेज नहीं चल पाने वाले लोग रोजाना कम-से-कम पांच किलोमीटर पैदल चलें। 
*दिल के मरीज हैं तो...*
- रोजाना वॉक करें, पर ध्यान रहे कि सांस ज्यादा न फूले। 
- वेटलिफ्टिंग ज्यादा न करें इससे बीपी बढ़ सकता है। 
नोट : ब्रिस्क वॉक हमेशा खाना खाने के दो घंटे बाद करें। वक्त की दिक्कत है तो 2 बार में 15-15 मिनट के लिए भी कर सकते हैं। 
*योगासन* 
- रोजाना कम-से-कम 10 बार सूर्य नमस्कार करें। 
- सिर से पैर तक की मूवमेंट के अलावा पादहस्तासन, त्रिकोणासन, शशांकासन, वक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, मेरुदंडासन और उत्तानपादासन करें। ये दिल के लिए अच्छे हैं। 

*दिल के मरीज हैं तो...*
ऐसे आसन न करें, जिनमें सारा प्रेशर हार्ट पर आता है, जैसे कि मयूरासन, शीर्षासन आदि। बाकी कर सकते हैं, लेकिन रफ्तार कम रखें और देखें कि दिल पर फालतू प्रेशर न हो। वैसे, कोई भी एक्सरसाइज या आसन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें। 

*प्राणायाम*
- सुबह-शाम 15-15 मिनट के लिए मेडिटेशन करें। इसके अलावा, गहरी सांस और अनुलोम-विलोम भी जरूर करें। 
- शवासन करें। आंखें बंद करके पूरे शरीर के अंगों को महसूस करें। इससे मांसपेशियों का तनाव कम होता है। इससे बीपी कम होता है। 

*दिल के मरीज हैं तो...* 
दिल के मरीज भस्त्रिका न करें तो बेहतर है। ऊपर लिखी बाकी क्रियाओं को कर सकते हैं। बस सांस बहुत देर तक न रोकें। 

*इन्हें भी आजमाएं*
तनाव कम करने के तरीके अपनाएं। ये सेहतमंद और बीमार,सभी के लिए फायदेमंद हैं : 
- पेंटिंग, फोटॉग्रफी,गाना सुनना, खेलना, किताबें पढ़ना जैसी हॉबी के लिए टाइम निकालें। 

- बच्चों के साथ समय व्यतीत करें
- घूमने जाएं। नई-नई जगहें मन को रिलैक्स करती हैं। 
- कॉम्पिटिशन की अंधी दौड़ से बचने की कोशिश करें।

*डाइट*
दिल की बीमारी से बचने के लिए और बीमारी हो जाने पर डाइट मोटे तौर पर एक जैसी ही रहती है। 

*क्या खाएं*
- हाई-फाइबर वाली चीजें (गेहूं, ज्वार, बाजरा, जई, दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स, चना, दाल, ब्राउन राइस आदि), फॉलिक एसिड वाली चीजें (हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी के बीज आदि),ओमेगा-थ्री वाली चीजें (सरसों तेल, बीन्स, बादाम, अखरोट, फिश लीवर ऑयल, फ्लैक्स सीड्स आदि)। इसके अलावा मेथी, लहसुन, हल्दी, सोयाबीन भी दिल के लिए अच्छे हैं। 
- स्किम्ड, फैट फ्री दूध और अंडे का सफेद हिस्सा खाना बेहतर है। 
- दिन में पांच बार फल और सब्जियां जरूर खाएं। 
- पानी खूब पीएं। दिन भर में करीब 10 गिलास पानी पिएं। 

*क्या न खाएं*
- फास्ट फूड (मैगी, नूडल्स, बर्गर, पित्जा, पास्ता आदि), तली-भुनी चीजें (समोसा, टिक्की, ब्रेड पकौड़े आदि), सॉफ्ट ड्रिंक्स (कोला), क्रीमी और मीठी चीजें (फ्रूट क्रीम, केक, पेस्ट्री, गुलाबजामुन, जलेबी, इमरती आदि), रिफाइन चीजें (चीनी, चावल, मैदा आदि), सैचुरेटिड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल, मियोनिज आदि), पैक्ड फूड (सॉस, अचार, चिप्स, कुकीज़ आदि) के अलावा अंडे का पीला भाग, रेड मीट, फुल क्रीम दूध और नमक कम खाएं। दिन भर में आधा चम्मच नमक काफी है। 
*इनसे छुड़ाएं पीछा*
- तंबाकू का सेवन न करें। स्मोकिंग से आर्टरीज़ सुकड़ती हैं, जिससे हार्ट और ब्लड वेसल्स को नुकसान होता है। स्मोकिंग से दिल की बीमारी का खतरा 30-50 फीसदी तक बढ़ जाता है। 
- शराब भी अगर हफ्ते में दो बार छोटे पैग तक पीते हैं तो नुकसानदेह नहीं है लेकिन इससे ज्यादा शराब पीना नुकसान पहुंचाता है। 
- पेन किलर और वे दवाएं, जिनमें स्टेरॉयड होते हैं (अस्थमा या स्नोफीलिया की दवाएं आदि) उनसे बचना चाहिए। वैसे, कोई भी दवा शुरू करने से पहले कार्डियॉलजिस्ट या अच्छे चिकित्सक से जरूर सलाह लें। 

*टेस्ट और मशीन*
- रिस्क फैक्टर (फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग, शराब पीने वाले आदि) वाले लोग हाई बीपी की जांच 25 साल की उम्र से शुरू कराएं। सामान्य लोग 35 साल की उम्र से यह टेस्ट कराएं। कुछ गड़बड़ी नजर आती है तो हर दो हफ्ते में बीपी की जांच कराएं। सामान्य होने के बाद एक-दो महीने में जांच करा लें। 
- घर में बीपी की जांच के लिए डिजिटल बीपी मशीन ले सकते हैं।
- लंबे समय तक बीपी की दवाएं लेने से उनका साइड इफेक्ट्स (सिर दर्द, पैरों में सूजन, हार्ट रेट बढ़ना, खांसी आदि) हो सकते हैं। ऐसा कुछ हो तो अपने चिकित्सक को बताएं। चिकित्सक जरूरत के मुताबिक दवा बदल देंगे। 

*नमक कम न करना* 
अक्सर लोग नमक कम नहीं करते, जोकि बीपी कंट्रोल करने के लिए बहुत जरूरी है। उन्हें लगता है कि दवाएं तो खा ही रहे हैं, सो कुछ भी खा सकते हैं लेकिन खान-पान का बीपी कंट्रोल में बहुत बड़ा रोल है। 

*S का फॉर्म्युला* 
सॉल्ट, शुगर, स्ट्रेस, सेडेंटरी लाइफस्टाइल, स्मोकिंग, स्प्रिट (शराब) कम करें तो दिल की सेहत बढ़िया रहेगी। 

*बच्चों में बीपी* 
लोग मानते हैं कि बच्चों को बीपी नहीं होता, जोकि सही नहीं है। 5 साल की उम्र के बाद हर 6 महीने में एक बार बच्चों का बीपी चेक करा लेना चाहिए। इसे जांचने का सही तरीका है राइट अपर आर्म और राइट लोअर लिंब (थाई) में सही नाप के कफ पहनाकर बीपी लेना चाहिए। बड़े साइज के कफ से सही रीडिंग नहीं आती। 
*उच्च रक्तचाप बीपी का होमियोपैथिक इलाज*

इलाज की लंबी तैयार प्रक्रिया में, होम्योपैथिक उपचार बेहद प्रभावी और भरोसेमंद तरीके हैं।
होमियोपैथी चिकित्सा बीमारिनके मूल कारणों को जानकर इलाज करती,मानसिक और शारीरिक कारण दोनों को समझ कर होमियोपैथी उपचार किया जाता है जिस से मरीज को आराम पूर्णतः मिलता है

*कुछ होमियोपैथिक दवाएं*
*एकोनिटियम*: कुछ उच्च रक्तचाप की स्थिति में अचानक विस्फोट होते हैं यह मरने और तीव्र चिंता विकार का भय पैदा करता है. एकोनिटम ऐसी स्थितियों को रोकता है.

*अरजेंटम नाइट्रिकम*: कभी-कभी उच्च रक्तचाप चिंता और मानसिक आंदोलन के कारण होता है. इस तरह की स्थितियां ठीक करने में चांदी नाइट्रिकम प्रभावी उपाय है.

*नेत्र्रम मुरीयाटिकम*: दबा हुआ क्रोध और तनाव के कारण कुछ उच्च रक्तचाप की स्थिति पैदा होती है. अतीत और अनसुलझी मुद्दों की कटाई वाली घटनाएं उच्च रक्तचाप के स्तर को बढ़ा सकती हैं. नट्रम मुरीयाटिकम ऐसी परेशानियों का एक आदर्श समाधान है.

*Veratum Viride*: Veratum Viride धमनी तनाव को कम करने और कार्डियक पाल्स्पेटेशन को सामान्य करने में मदद करता है.

*प्राकृतिक पूरक आहार*: उच्च रक्तचाप की वजह से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के लिए, होम्योपैथी रक्तचाप की चिंता का समाधान करने के लिए सह एंजाइम, हॉथोर्न, ओमेगा -3, विटामिन ई जैसे कुछ प्राकृतिक पूरक प्रदान करता है. यह हृदय समारोह में सुधार करता है और रक्त के क्लॉट को रोकता है.

*इग्निटिया* भावनात्मक उत्तेजना, दुःख और आघात के कारण उच्च रक्तचाप को चंगा करने के लिए, इग्नाटिया को एक उपयोगी उपाय माना जा सकता है.

*बेलाडोना*: यह एक आपातकालीन चिकित्सा स्थिति है जो धमनियों के जोरदार धड़कते हैं जो कि रक्तस्राव के लिए प्रगति कर सकते हैं. बेलडाडो इस तरह के अत्याधुनिक चिकित्सा आपातकालीन स्थिति को टिम करने में काफी मदद करते हैं.

*लैशेसिस*: कुछ शारीरिक परिवर्तन उच्च रक्तचाप के परिणामस्वरूप, खासकर महिलाओं के मामलों में रजोनिवृत्ति की शुरुआत के दौरान, उच्च रक्तचाप आम सहवर्ती हो जाता है. ऐसे मुद्दों के इलाज के लिए लैशेस का उपयोग किया जाता है.

*ग्लोनिनियम*: कुछ अवसरों पर सूर्य की गर्मी और अधिक जोखिम के कारण ब्लड प्रेशर लेवल शूट होता है. ग्लोनिनियम उन स्थितियों में रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से है
*कई रोगी उपचार कराकर ठीक हो गए है व अन्य कई रोगियों का इलाज चल रहा है*

*नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।*

*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
होमियोपैथिक चिकित्सक
त्रिवेदी होमियोपैथिक क्लिनिक
लिली चौक,पुरानी बस्ती,
बरई मंदिर रोड, रायपुर, छत्तीसगढ
*8462030001*
*Facebook instagraam*
*@Dr.Trivedis Homeopathy*

Comments

Popular posts from this blog

डेंगू का बचाव व इलाज होमियोपैथी से

*तेज धूप से खुद को बचाने मे काम आएगी होमियोपैथी :डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*

डिप्रेशन (अवसाद) का उपचार होमियोपैथी से