सफेद दाग का इलाज होमियोपैथी से संभव
*सफेद दाग का इलाज होमियोपैथी से संभव -डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती बरई मंदिर गली स्थित त्रिवेदी होमियोपैथी क्लिनिक के चिकित्सक डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी बताते है कि,सफेद दाग एक त्वचा रोग है, इसे श्वेत कुष्ठ भी कहते हैं। सफ़ेद दाग अथवा विटिलिगी अथवा ल्युकोडरमा या फुलेरी एक ही बीमारी के कई नाम हैं।
इस रोग में त्वचा पर कहीं एक सफ़ेद दाग बनता है और यदि ध्यान नहीं दिया गया तो धीरे-धीरे शरीर के अधिकांश भागों या पूरे शरीर में फैल जाता है। विश्व का आंकड़ा देखा जाए तो इस रोग से कुल जनसंख्या का लगभग दो प्रतिशत प्रभावित है लेकिन भारत में यह रोग चार से पांच प्रतिशत लोगों को है।
इस रोग को समाज में कलंक के रूप में देखा जाता है, इसलिए जिसे यह रोग हो जाता है, उनसे लोग बचने की कोशिश करते हैं, इस वजह से रोगी हताश व निराश होता है।
होमियोपैथी में इसका समुचित व सफल इलाज है।
*सफेद दाग के कारण*
यह रोग त्वचा द्वार ‘मिलेनिन’ नामक पदार्थ (जो कि त्वचा का रंग निर्धारित करता है) का बनना बंद हो जाने के कारण होता है, लेकिन त्वचा ग्रंथियों एवं कोशिकाओं में ऐसी कौन-सी खराबी आ जाती है कि मिलेनिन का बनना रुक जाता है, यह अभी तक अबूझ पहेली ही है। यह अण्डाकार अथवा छितरे हए धब्बों के रूप में शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसमें किसी प्रकार की खुजली अथवा अन्य कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। अब वैज्ञानिक यह मानने लगे हैं कि संभवतया मानसिक दबाव के साथ-साथ थायराइड ग्रंथि से संबंधित बीमारियों में शरीर के ऊतकों में किसी वजह से कठोरता एवं सिकुड़ाव आ जाने के कारण,गंजापन होने के कारण एवं खून की कमी होने पर सफेद दाग के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। सिफिलिस रोग की वजह से भी सफेद दाग बन सकता है।
*सफ़ेद दाग होने पर क्या खाएं*
गाजर, लौकी, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें व सोयाबीन का सेवन ज़्यादा करें।
– रोज़ कम से कम 30 ग्राम भीगे हुए काले चने व 3-4 बादाम ज़रूर खाएं।
– रात को तांबे के बर्तन में पानी रख दें, सुबह आठ घंटा हो जाने के बाद उसे पियें।
– रोज़ ताजा गिलोय या एलोवेरा का जूस पीने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
*सफेद दाग में परहेज*
– नींबू, संतरा, टमाटर, अंगूर, आम, आंवला अचार, उड़द की दाल, दही, लस्सी, मिर्च व मैदा आदि से परहेज़ करें।
– हेयर डाई, परफ्यूम, डियोड्रेंट व पेस्टिसाइड को शरीर के संपर्क में न आने दें।
– दूध के साथ नमक, मूली मांस आदि न खाएं। फ़ास्ट फूड का सेवन कम करें।
– अधिक रसायनों से युक्त साबुन या डिटर्जेंट का प्रयोग न करें।
*सफेद दाग का होम्योपैथिक इलाज*
सफेग दाग के इलाज में होम्योपैथी चिकित्सा बहुत ही कारगर साबित होती है।
यदि सफेद दाग का कारण ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर है तो सबसे पहले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है। ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर के कई कारणों में से एक तनाव भी है। इसके लिए निम्नलिखित दवाइयां दी जा सकती हैं।
– इग्नेशिया- 30
– नेट्रम म्यूर- 30
– पल्सेटिल्ला- 30
– तनाव की वजह से सफेद दाग होने पर नक्स वॉमिका- 30
यदि कारण केमिकल एक्सपोजर है तो निम्नलिखित दवाइयां दी जा सकती हैं-
– सल्फर- 30
– आर्सेनिक एल्बम- 30
– अगर कारण जिनेटिक है तो सिफलिनम- 200 उपयोगी है।
– सफेद दाग का कोई भी कारण समझ में न आ रहा हो तो आर्सेनिक सल्फ फ्लेवम- दिया जा सकता है
वैसे, व्यक्ति के हाव-भाव, आचार-विचार, पूर्व इतिहास, खान-पान आदि को देखते हुए समान लक्षणों के आधार पर कोई भी दवा दी जा सकती है,
*सम्पूर्ण बातें रोगी से जानने के बाद एक व्यवस्थित मानसिक एवं शारीरिक आधार पर खोजी गई दवा अत्यन्त उपयोगी है, जिसे होमियोपैथी की भाषा में कान्सटीट्यूशनल रेमेडी कहते हैं। फिर बीमारी के कारणों के आधार पर दवा देते हैं*
जैसे यकृत संबंधी परेशानियों के साथ सफेद दाग होने पर ‘कालमेग’, ‘चेलीडोनियम’ दवाओं का अर्क, पेट की गड़बड़ी के साथ सफेद दाग होने पर ‘वेरवोनिया’ दवा का अर्क एवं ‘क्यूप्रम आक्स नाइग्रम’ दवा, सिफिलिस रोग होने पर ‘सिफिलाइनम’ नामक दवा दी जा सकती है।
त्वचा मोटी एवं पपड़ीदार होने पर ‘हाइड्रोकोटाइल’ दवा का अर्क अत्यंत कारगर है। बेचैनी, रात में डर, ठंड लगना, जाड़े में अधिकतर परेशानियों का बढ़ना, जल्दी-जल्दी ठंड का असर पड़ना, खुली हवा में घूमने से परेशानी बढ़ना, बहुत कमजोरी एवं हर वक्त लेटे रहने की इच्छा, सीधी करवट लेटने पर अन्य सभी परेशानियों का बढ़ जाना, जलन, सूखी त्वचा खुजलाने पर जलन बढ़ जाना, घुटने में पीड़ा, छाती में सुइयों की चुभन एवं सांस लेन में तकलीफ होने पर ‘आर्सेनिक सल्फ,रात में परेशानियों का बढ़ जाना एवं शरीर में जगह-जगह घाव होने पर ‘सिफिलाइनम’ भी दी जा सकती है।
*कई रोगी उपचार कराकर ठीक हो गए है व अन्य कई रोगियों का इलाज चल रहा है*
*नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।*
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
होमियोपैथिक चिकित्सक
त्रिवेदी होमियोपैथिक क्लिनिक
लिली चौक,पुरानी बस्ती,
बरई मंदिर रोड, रायपुर, छत्तीसगढ
*8461030001*
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*@Dr.Trivedis Homeopathy*
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