*बच्चो को कुपोषित होने से बचाये होमियोपैथी अपनाए :डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
*बच्चो को कुपोषित होने से बचाये होमियोपैथी अपनाए :डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
अकसर मम्मियां शिकायत करती हैं कि मैं तो बच्चे के खाने-पीने का पूरा ध्यान रखती हूं, फिर भी उसके शरीर को कुछ लगता ही नहीं. दरअसल, यह शिकायत पेट में कीड़े की वजह से हो सकती है, जिसे पहचानने की जरूरत है. ज्यादातर छोटे बच्चों को कृमि का संक्रमण होता है, जिसके कारण ही उनका पोषण प्रभावित होता है. इससे उन्हें खून की कमी या एनीमिया भी हो सकता है.
होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी बताते है कि बच्चों को होने वाले पेट में कृमि को निकालने के लिए मीठी गोलियां (होम्योपैथिक) काफी सहायक हैं। बच्चों के पेट में कृमि होना एक आम समस्या है जो दूषित पानी पीने और भोजन करने, नंगे पैर चलने, अधपका मांस खाने, संक्रमित भोजन, फल व सब्जियां खाने, संक्रमित व्यक्ति व जानवरों के सम्पर्क में रहने से होता है।
बच्चों के पेट में कृमि (वॉर्म) होने की समस्या काफी आम है.अधिकतर व्यक्ति अपने जीवनकाल में कभी-न-कभी इस रोग से जरूर ग्रसित होते हैं. कृमि के शरीर के विभिन्न हिस्सों में होने के अलग-अलग लक्षण दिखते हैं.
*लक्षण* : लक्षण वॉर्म की संख्या पर निर्भर करते हैं. लार्वा के शरीर में प्रवेश करने के बाद लाल चकत्ते, खांसी, सांसों का तेज चलना, बुखार इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं. आंत में जगह बनाने के बाद पेट दर्द, पेट फूलने, उल्टी, चिड़चिड़ापन, शरीर का कम विकास, खून की कमी, सूजन इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं. बच्चों में यह काफी आम बात है.कृमि के संक्रमण से उनके मलद्वार में खुजली होती है.
ऐसा करना चाहिए
*क्या सावधानी रखें*
उन्होंने बताया कि पेट के कीड़ों के संक्रमण से बचने के लिए धुली व साफ की गयी सब्जियां, फलों का प्रयोग करना चाहिए। अधपका मांस नहीं खाना चाहिए। खाना बनाने से पहले पूरी तरह स्वच्छता निश्चित कर लेनी चाहिए, फलों एवं सब्जियों को साफ कर लेना चाहिए। जमीन पर गिरे फल एवं भोजन आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। साबुन से हाथ धोकर ही कोई चीज खाना चाहिए। बच्चे को नंगे पांव जमीन पर नहीं घूमने देना चाहिए। घरेलू जानवरों के सम्पर्क से बचाना चाहिए तथा घरेलू जानवर को कृमि नाशक दवाई अवश्य खिला देना चाहिए
*होमियोपैथी उपचार*
डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी के अनुसार होम्योपैथिक औषधियां बच्चे के शरीर में होने वाले विकारों दूर करने में पूरी तरह सक्षम है इसके साथ ही यह दवाएं बच्चे के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर कीड़े के पुन: संक्रमण की संभावना को कम करती हैं।
*बच्चे के शारीरिक व मानसिक लक्षणों* के आधार पर पेट के कीड़ों को निकालने एवं शरीर पर होने वाले कुप्रभावों को दूर करने के लिए *होमियोपैथी में भी कई ऐसी दवाइयां हैं, जो इसके कृमि को निकालने में काफी मददगार सिद्ध होती हैं.*
*सिना* : बच्चे को जब खूब भूख लगे, खूब चिड़चिड़ापन रहे. किसी का छूना बच्चे को जरा भी बरदाश्त नहीं हो. बच्चा जो भी सामान देखेगा, उसे मांगेगा, मगर उसे देने पर उसे फेंक देगा. खूब खाने के बाद भी वह कमजोर हो. कभी उसे कब्ज रहेगा या फिर शौच ढीला होगा. स्टूल में कॉर्न के जैसे पैच और आंव दिख सकते हैं. मलद्वार में तेज खुजली होगी. *क्यूप्रियम वेरा* : मलद्वार में तेज खुजली होती हो, रात को बेड पर जाते ही बच्चा परेशान हो जाता हो. मलद्वार में कुछ काटने जैसा एहसास हो तब,इस दवा का उपयोग आमतौर पर थ्रेडवॉर्म के उपचार में किया जाता है.
*सेंटोनिन* : मलद्वार में खुजली होती हो, चिड़चिड़ापन रहे और बच्चा दांत कटकटाता रहे. उलटी के जैसा महसूस हो, मगर कुछ खाने के बाद महसूस होना बंद हो जाये. नाक में खूब खुजली होती हो. बच्चा हमेशा नाक में उंगली रखना पसंद करे, तब नोट : बुखार या कब्ज हो, तब यह दवा न दें.
*टेप वॉर्म* : यह बहुत ही खतरनाक कृमि है. यह दिमाग तक भी पहुंच जाता है, जिसके कारण *न्यूरोसिस्टसारकोसिस* नाम का रोग हो जाता है. इस रोग के हो जाने पर *फिलिक्स मास* नाम की दवा व सभी दवा का प्रयोग चिकित्सक की सलाह पर किया जा सकता है।
कीड़ों से बचने के लिए साफ-सफाई सबसे बड़ी जरूरत है इसलिये इस पर पूरा ध्यान देना चाहिए।
*कई रोगी उपचार कराकर ठीक हो गए है व अन्य कई रोगियों का इलाज चल रहा है*
*नोट- होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करके रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।*
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
होमियोपैथिक चिकित्सक
त्रिवेदी होमियोपैथिक क्लिनिक
लिली चौक,पुरानी बस्ती,
बरई मंदिर रोड, रायपुर, छत्तीसगढ
*8461030001*8462030001*
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*@Dr.Trivedis Homeopathy*
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