स्वाइन फ्लू का इलाज होमियोपैथीके से संभव - डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी
*स्वाइन फ्लू का उपचार होमियोपैथी से संभव*
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
*स्वाइन-फ्लू* एक वाइरस के द्वारा होने वाला संक्रमण है
यह स्पर्श द्वारा बहुत ही तेजी से फैलने वाला संक्रमण है, और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है। स्वाइन-फ्लू का वाइरस सुअर से मनुष्य में आया है और अब यह एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में तेजी से फ़ैल रहा है। इसे एच 1 एन 1 फ्लू, पिग फ्लू, होग फ्लू, स्वाइन-इन्फ़्लुएन्ज़ा भी कहते हैं। सबसे पहले स्वाइन-फ्लू का अप्रैल 2009 में यूनाइटेड-स्टेट में पता चला था।
*लक्षण* : स्वाइन-फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू के सामान ही होते हैं जैसे *बुखार,खांसी,गले में दर्द,नाक से पानी बहना,शरीर में दर्द होना,ठण्ड लगना,सिरदर्द होना,थकान महसूस होना,भूख नहीं लगना,कुछ लोगों को दस्त और उल्टी* भी हो सकती है
इसके अलावा भी कुछ और लक्षण हो सकते है जैसे –
*बच्चों में*
*सांस लेने में तकलीफ,उल्टी होना,बुखार के साथ रेशेज़ होना*
*बडों (adult) में*
*सांस लेने में तकलीफ,सीने या पेट में दबाव,थकान,कमजोरी*
*कैसे फैलता है स्वाइन-फ्लू*
स्वाइन-फ्लू एक सामान्य फ्लू की तरह ही फैलता है जैसे –
1) संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से।
2) स्वाइन-फ्लू से संक्रमित व्यक्ति की चीजों को छूने से।
* किसको ज्यादा खतरा है एच 1 एन 1 से*
1) गर्भवती महिलाओं को
2) एक साल से कम उम्र के बच्चों को
3) 65 से अधिक उम्र के लोगों को
4) हार्ट के रोगी को
5) एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति को
6) बहुत लम्बे समय से किसी रोग से पीड़ित व्यक्ति को जिसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया हो
7) हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी
*कैसे बचें स्वाइन-फ्लू से*
1) खांसते या छींकते समय नाक व मुंह पर टिशू-पेपर रखें और बाद में ठीक से कचरा पेटी में डालें।
2) खांसने या छींकने के बाद हांथ साबुन से धोएं।
3) संक्रमित व्यक्ति को छूने के बाद अपने आँख, मुंह और नाक को न छुएं क्योंकि इनसे संक्रमण जल्दी फैलता है।
4) स्वाइन-फ्लू से संक्रामित व्यक्ति से दूरी बना कर रखें।
5) अगर आप स्वाइन-फ्लू से संक्रामित हैं तो स्कूल या ऑफिस न जाकर घर पर ही रहें।
*होम्योपथिक दवाएं*
होम्योपथी में रोग के नाम से कोई दवा नहीं होती है, रोगी के लक्षण के अनुसार चिकित्सकीय सलाह के बाद ये दवायें दे सकते हैं।
1) *आर्सेनिक – एल्बम 30 /200* – यह दवा रोग के शुरुआत में उपयोगी है। मांस खाने के कारण होने वाले रोग, सांस लेने में तकलीफ, नाक से पतला पानी जैसा बहे, आंखों में जलन हो, तेज ज्वर के साथ बेचैनी, कमजोरी लगे, बुखार कभी ठीक हो जाता है। कभी फिर से हो जाता है। बहुत तेज प्यास लगती है। (यह दवा रात को नहीं खाएं)
2) *एकोनाएट* (Aconite)30 – अचानक से और तीव्र गति से होने वाला बुखार, जिसमें बहुत ज्यादा शारीरिक व मानसिक बेचैनी होती है। बहुत ज्यादा छीकें आना, आँखें लाल सूजी हुई, गले में दर्द व जलन। (इस दवा को रात कोनहीं खाएं)
3) *नक्स -वोमिका* रोगी को बहुत ठण्ड लगती है। कितनी भी गर्मी पहुंचाई जाए ठण्ड नहीं जाती है, शरीर में दर्द, सर्दी जुकाम, दिन में नाक से पानी बहता है और रात को नाक बंद हो जाती है, खांसी के साथ छाती में दबाव, सांस लेने में तकलीफ, खांसी के कारण सिरदर्द, आँखों से पानी गिरना।
*जेल्सिमियम( Gelsemium)* सारे शरीर में दर्द रहता है। रोगी नींद जैसी हालत में पड़ा रहता है, सिरदर्द, खांसी, जुकाम, आँखों में दर्द, सिर के पिछले भाग में दर्द, सिरदर्द के साथ गर्दन व कंधे में दर्द, छींकें, गले में निगलने में दर्द, बुखार में बहुत ज्यादा कांपता है, प्यास बिलकुल नहीं लगती है, चक्कर आते हैं।
5) *ब्रायोनिया* प्यास बहुत ज्यादा लगती है, सारे शरीर के मसल्स में दर्द जो कि हिलने-डुलने से बढ़ता है और आराम करने से ठीक होता है। सिरदर्द के साथ पसलियों में दर्द, सूखी खांसी, उल्टी के साथ छाती में दर्द, चिड़चिड़ा होता है, गले में दर्द होता है, बलगम रक्त के रंग का होता है।
6) *बेपटीसिया* धीमा बुखार, मसल्स में बहुत ज्यादा दर्द, सांस, पेशाब, पसीना आदि सभी स्त्राव से बहुत ज्यादा दुर्गन्ध आती है। महामारी के रूप में फैलने वाला इन्फ़्लुएन्ज़ा। लगता है कि शरीर टूट गया है, बड़बड़ाता है, बात करते-करते सो जाता है, मुहं में कड़वा स्वाद, गले में खराश, दम घुट जाने जैसा लगे, कमजोरी बहुत ज्यादा लगे।
7) *सेबेडिला* सर्दी जुकाम, चक्कर बहुत ज्यादा छींकें, नींद नहीं आती है, आँखें लाल व जलन करती हैं, नाक से पतला बहता पानी, सर्दी के कारण सुनने में तकलीफ, गले में बहुत ज्यादा दर्द, गरम चीजें खाने-पीने से आराम, सूखी खाँसी।
8) *एलियम -सीपा* नाक से तीखा स्त्राव, माथे में दर्द, आँखें बहुत ज्यादा लाल व पानी गिरता है, पलकों में जलन, कान में दर्द, छींकें, नाक से बहुत ज्यादा पानी आता है, गले में दर्द, जोड़ों में दर्द होता है।
9 *युपटोरियम-पर्फोलियम*
इन्फ़्लुएन्ज़ा के साथ सारे मसल्स व हड्डियों में दर्द, छींकें, गले व छाती में दर्द, बलगमयुक्त खाँसी, सुबह 7 से 9 बजे ठण्ड लगती है।
*प्रतिरोधकदवा preventive medicine*
1) थूजा (THUJA)200
2) जेल्सिमियम( GELSEMIUM)
3) नक्स –वोमिका
4) इन्फ़्लुएन्ज़िउम (INFLUENZIU
5) आर्सेनिक एल्बम
नोट – होम्योपथी में रोग के कारण को दूर कर के रोगी को ठीक किया जाता है। प्रत्येक रोगी की दवा उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना चिकित्सकीय परामर्श यहां दी हुई किसी भी दवा का उपयोग न करें।
*डॉ उत्कर्ष त्रिवेदी*
*होमियोपैथिक चिकित्सक*
*डॉ त्रिवेदिस होमियोपैथी*
*लिली चौक,पुरानी बस्ती रायपुर छत्तीसगढ़*
*8462030001*
*फेसबुक,इंस्टाग्राम,ट्विटर पर फॉलो करें @drtrivedishomeopathy*
Comments
Post a Comment